भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई जबरदस्त रफ्तार: सितंबर तिमाही में जीडीपी 8.2% बढ़ी
अनुमानों से बहुत आगे निकला प्रदर्शन
नई दिल्ली, 28 नवंबर (एजेंसियां)।भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर) में उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, Q2 में देश की जीडीपी 8.2% की तेजी से बढ़ी, जो न केवल घरेलू विश्लेषकों बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमान से भी काफी अधिक है। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि वृद्धि दर 7.3% के आसपास रहेगी, जबकि एसबीआई रिसर्च ने इसे 7.5% और ब्लूमबर्ग ने 7.4% रहने का अनुमान जताया था। लेकिन वास्तविक आंकड़े इन सभी आकलनों को पीछे छोड़ते हुए भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थिरता का स्पष्ट संकेत देते हैं।
दूसरी तिमाही में मिली यह तेज वृद्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ का दबाव और कुछ अन्य बाहरी चुनौतियाँ मौजूद थीं। इसके बावजूद उपभोग में तेजी, विनिर्माण क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार की बदौलत भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में और अधिक मजबूती के साथ उभरी है। यह रफ्तार पहली तिमाही (Q1) में दर्ज 7.8% की वृद्धि दर से भी बेहतर रही। वहीं, पिछले वर्ष की समान अवधि में वृद्धि दर केवल 5.4% थी, जिससे यह स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी पहले की तुलना में काफी अधिक व्यापक और स्थायी है।
दूसरी तिमाही में खपत (कंजम्पशन) में सालाना आधार पर 7.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पहली तिमाही में यह वृद्धि 7.0% थी। तिमाही के दौरान जीएसटी दरों में कुछ श्रेणियों पर कटौती और त्योहारी सीजन की मांग ने उपभोग को मजबूत सहारा दिया। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग बढ़ने से बाजार में जोश देखने को मिला, जिसने आर्थिक गतिविधियों को गति दी।
विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन इस तिमाही की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। तिमाही में इस सेक्टर की वृद्धि 9.1% रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह वृद्धि केवल 2.2% थी। उद्योग जगत के अनुसार, जीएसटी से जुड़े ढांचे में सरलता, इनपुट लागतों में कुछ स्थिरता और निर्यात मांग में हल्की सुधार ने उत्पादन बढ़ाने में मदद की। कारखानों में उत्पादन में आई यह तेजी समग्र जीडीपी वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान लेकर आई। विनिर्माण क्षेत्र का देश की कुल जीडीपी में लगभग 14% हिस्सा है, ऐसे में इसकी मजबूत गति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।
निर्माण क्षेत्र (कंस्ट्रक्शन सेक्टर) की वृद्धि 7.2% दर्ज की गई। भले ही यह दर पहली तिमाही के 7.6% से कुछ कम है, लेकिन निरंतर मजबूत प्रदर्शन यह दर्शाता है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, आवासीय निर्माण और सरकारी–निजी निवेश का प्रवाह स्थिर बना हुआ है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए इसकी निरंतर गति सामाजिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से अहम है।
हालाँकि इस तिमाही में सरकारी खर्च में गिरावट दर्ज की गई। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में सरकारी व्यय में 2.7% की कमी आई, जबकि पहली तिमाही में सरकार ने 7.4% की वृद्धि के साथ खर्च बढ़ाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और घाटा नियंत्रित रखने की नीति के तहत यह कमी रणनीतिक हो सकती है। इसके बावजूद निजी खपत और उद्योग उत्पादन में वृद्धि की वजह से जीडीपी पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।
अक्टूबर 2025 में एफपीआई की वापसी ने भी आर्थिक माहौल को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों में 1.65 अरब डॉलर का निवेश किया, जिससे बाजार की तरलता बढ़ी और निवेशकों के बीच भरोसा मजबूत हुआ।
भारतीय अर्थव्यवस्था की यह रफ्तार यह संकेत देती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की विकास क्षमता स्थिर है और मौलिक आर्थिक कारक मजबूत बने हुए हैं। उपभोग में सुधार, उद्योग उत्पादन में बढ़ोतरी और घरेलू मांग का लगातार विस्तार आने वाली तिमाहियों में भी विकास दर को गति दे सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों में संतुलन कायम रहा, तो वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए रिकॉर्ड वृद्धि वाला वर्ष साबित हो सकता है।

