कोर्ट का बड़ा फैसला: लाल किला विस्फोट के चार आरोपी 10 दिन की NIA हिरासत में

आतंकियों की पूरी साजिश उजागर करने की तैयारी

कोर्ट का बड़ा फैसला: लाल किला विस्फोट के चार आरोपी 10 दिन की NIA हिरासत में

नई दिल्ली, 29 नवम्बर,(एजेंसियां)। दिल्ली में लाल किला विस्फोट मामले ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में कार्रवाई तेज करते हुए चार और मुख्य आरोपियों—डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राठेर, डॉ. शाहीन सईद और मुफ्ती इरफान अहमद वागे—को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी को पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष NIA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने बंद कमरे में हुई अहम सुनवाई के बाद उनकी NIA हिरासत को दस दिनों के लिए बढ़ा दिया। इस कार्रवाई के साथ ही इस धमाके से जुड़े गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि विस्फोट की साजिश बेहद गहरी और संगठित थी।

NIA की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि लाल किला विस्फोट की योजना कई राज्यों और विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में फैले नेटवर्क के माध्यम से संचालित की गई थी। एजेंसी का दावा है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। ये आरोपी न केवल साजिश के केंद्र में थे, बल्कि जांच में यह भी सामने आया है कि उन्होंने विस्फोट को अंजाम देने के लिए कई तकनीकी और लॉजिस्टिक तैयारियां की थीं। अदालत में पेशी के दौरान NIA ने अदालत को बताया कि आतंकियों के इस नेटवर्क की गहराई का पता लगाने और इनके संपर्क सूत्रों की जानकारी हासिल करने के लिए पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने NIA के अनुरोध को स्वीकार करते हुए सभी चार आरोपियों को दस दिन की हिरासत में भेजा।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तीन का ताल्लुक जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, अनंतनाग और शोपियां जैसे संवेदनशील इलाकों से है, जबकि एक आरोपी लखनऊ का निवासी है। यह नेटवर्क सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका फैलाव उत्तर भारत के एक से अधिक राज्यों तक था। इसी कारण NIA ने श्रीनगर, जम्मू और अन्य इलाकों में कई छापेमारी अभियान चलाकर इन संदिग्धों को उठाया। इन छापों के दौरान NIA को कई अहम दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संदिग्ध चैट, और अन्य संवेदनशील सामग्री प्राप्त हुई है, जिनसे आतंकियों की मंशा और भविष्य की योजनाओं के संकेत मिलते हैं।

ऐजेंसी के अनुसार इससे पहले दो और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। इनमें पहला था आमिर राशिद अली, जिसके नाम पर विस्फोट को अंजाम देने में इस्तेमाल की गई कार पंजीकृत थी। दूसरा आरोपी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश बताया जा रहा है, जिसने विस्फोट से जुड़े आतंकवादी को तकनीकी मदद उपलब्ध कराई थी। इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद से ही NIA पूरे नेटवर्क की परतें उधेड़ने में जुटी हुई थी। अब चार और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज होने के आसार हैं।

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जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपियों के पास से जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों में मिले डेटा की जांच जारी है। NIA को संदेह है कि इन आरोपियों के संपर्क आतंकी संगठनों के सक्रिय मॉड्यूल से थे और दिल्ली में हुए इस विस्फोट की योजना कई चरणों में बनाई गई थी। इस विस्फोट ने सुरक्षा एजेंसियों को झकझोर दिया था और पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इसीलिए NIA ने इस जांच को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया है।

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विशेष अदालत की जज अंजू बजाज चंदना ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसलिए जांच एजेंसी को आरोपियों से गहराई से पूछताछ करने का अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने इस बात को ध्यान में रखा कि आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य गंभीर प्रकृति के हैं और इनका संबंध आतंकी गतिविधियों से है। इसी आधार पर अदालत ने हिरासत बढ़ाने का फैसला किया। इस दौरान आरोपियों को मीडिया से दूर रखा गया और उनकी पेशी को पूरी तरह गोपनीय रखा गया।

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NIA की ताजा कार्रवाई से साफ है कि यह मामला सिर्फ एक विस्फोट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़े आतंकी साजिश का जाल छिपा हुआ है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, जिनमें UAPA की कड़ी धाराएं भी शामिल हैं। NIA आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारी कर सकती है, क्योंकि जांच में कई नए नाम और संपर्क सामने आए हैं। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि विस्फोट से जुड़े और ठिकानों व मॉड्यूल्स की पहचान की गई है, जिन पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

लाल किला देश की धरोहर और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। ऐसे प्रतिष्ठित स्थान को निशाना बनाना भारत की संप्रभुता और सुरक्षा पर सीधा हमला माना जाता है। इसीलिए जांच एजेंसियों पर इस पूरे मामले की तह तक जाने का भारी दबाव है। NIA की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां किसी भी कीमत पर इन आतंकियों को कानून के शिकंजे में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।