सोनिया-राहुल के खिलाफ नई FIR दर्ज

कांग्रेस का तीखा हमला; केंद्र, पुलिस और EC पर लगाए गंभीर आरोप

सोनिया-राहुल के खिलाफ नई FIR दर्ज

नई दिल्ली, 29 नवम्बर,(एजेंसियां)। नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ी जांच एक बार फिर राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गई है। दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य सहयोगियों के खिलाफ दर्ज नई FIR ने विपक्ष और केंद्र के बीच टकराव की राजनीति को एक बार फिर तेज कर दिया है। कांग्रेस ने इसे पूरी तरह ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ और ‘लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश’ बताया है।

कांग्रेस का पलटवार – “लोकतंत्र पर हमला, विपक्ष को दबाने की रणनीति”

नई FIR में सोनिया गांधी, राहुल गांधी के साथ ही सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी और एक अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। FIR में आरोप है कि आपराधिक साजिश के तहत एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) पर धोखे से कब्जा किया गया। साथ ही तीन कंपनियों — AJL, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड — को भी आरोपी के रूप में शामिल किया गया है।

FIR दर्ज होते ही कांग्रेस ने केंद्र सरकार और एजेंसियों पर सीधा और तीखा हमला बोला। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मोदी सरकार ने ईडी, सीबीआई और पुलिस जैसी एजेंसियों को विपक्ष को दबाने का हथियार बना दिया है।

वेणुगोपाल ने कहा,
“यह बिल्कुल साफ है कि ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कांग्रेस और विपक्ष को टारगेट करने के लिए किया जा रहा है। चाहे जितने केस दर्ज कर लें, हम डरने वाले नहीं हैं। पहले भी राहुल गांधी को एक केस की आड़ में लोकसभा से डिसक्वालिफाई किया गया था। यह सब लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश है।”

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उन्होंने आरोप लगाया कि आज जो भी स्वतंत्र रूप से सोचने लगता है, वह समझ सकता है कि भारत में लोकतंत्र ‘गंभीर संकट’ के दौर से गुजर रहा है।

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EOW की FIR – क्या कहा गया है?

दिल्ली पुलिस की EOW की FIR में दावा किया गया है कि —

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  • AJL की संपत्ति पर धोखे से कब्जा करने के लिए कथित आपराधिक साजिश रची गई।

  • यंग इंडियन कंपनी का गठन इसी उद्देश्य से किया गया।

  • कथित रूप से AJL की करोड़ों की संपत्ति का फायदा राजनीतिक रूप से जुड़ी इकाइयों को पहुंचाया गया।

यह मामला पहले से ही ईडी की जांच में है। ईडी ने 2022 में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से लंबी पूछताछ की थी। अब दिल्ली पुलिस की यह नई FIR मामला और गहरा कर रही है।

कांग्रेस का आरोप – “कानून का नहीं, राजनीतिक दबाव का मामला”

कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि यह FIR ऐसे समय में दर्ज की गई है जब 2026 के आम चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस का दावा है कि एजेंसियों का उद्देश्य विपक्षी नेताओं को लगातार दबाव में रखना है ताकि सरकार के खिलाफ आवाजें कमजोर पड़ें।

वेणुगोपाल ने कहा,
“जो सरकार अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकती, वह संस्थाओं को हथियार बनाकर विपक्ष को डराना चाहती है। लेकिन, कांग्रेस इस सरकार के हर दमन का मुकाबला करेगी।”

चुनाव आयोग भी निशाने पर – SIR प्रोग्राम पर गंभीर सवाल

कांग्रेस ने सिर्फ FIR पर ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग पर भी बड़े प्रश्नचिह्न लगाए। केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए Special Intensive Revision (SIR) अभियान पर कहा कि यह सिर्फ वोटर लिस्ट को ‘साफ’ करने का कार्यक्रम नहीं बल्कि ‘वोटर व्यवहार को प्रभावित करने की साजिश’ है।

उन्होंने कहा कि —

  • SIR के नाम पर वोटरों को ‘टारगेट करके’ हटाया जा रहा है।

  • कई इलाकों में विपक्ष समर्थक वोटरों को सूची से गायब करने की कोशिशें हो रही हैं।

  • केरल में CPI(M) सरकार पर भी आरोप लगाया गया कि वह SIR का इस्तेमाल अपने राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।

वेणुगोपाल ने कहा,
“यह सिर्फ वोटर लिस्ट की सफाई नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है। जिन वोटरों को वे पसंद नहीं करते, उनके नाम हटाए जा रहे हैं।”

नेशनल हेराल्ड केस – पृष्ठभूमि

नेशनल हेराल्ड की स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। AJL इसका प्रबंधन करती थी। बाद में AJL आर्थिक संकट में फंसी। कांग्रेस ने दावा किया था कि पार्टी ने AJL की मदद के लिए कर्ज दिया था।

  • ईडी और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यंग इंडियन ने AJL के 90% शेयर मात्र 50 लाख रुपये में हासिल किए और बाद में AJL की 800 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर ‘कब्जा’ किया।

  • कांग्रेस इसे ‘राजनीतिक साजिश’ और ‘एक पुरानी कंपनी को बचाने की वैध प्रक्रिया’ बताती है।

राजनीतिक तापमान और बढ़ा

नई FIR के बाद पूरे राजनीतिक परिदृश्य में हलचल बढ़ गई है। भाजपा इसे ‘कानूनी कार्रवाई’ बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे ‘तानाशाही का चरम’ करार दे रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और अग्निपथ योजना, महंगाई व बेरोजगारी पर सरकार को घेरने के बाद केंद्र ने यह कदम उठाया है।

नई FIR ने पुराने विवाद को फिर से ताजा कर दिया है और 2026 के चुनावों से पहले विपक्ष और सत्ता के बीच संघर्ष और तीखा होने वाला है।
कांग्रेस का कहना है कि वह अदालत से लेकर सड़क तक इस “राजनीतिक प्रतिशोध” के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी।