चुनाव आयोग ने बढ़ाई वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ की समय सीमा

अब 14 फरवरी तक चलेगा विशेष पुनरीक्षण; राजनीतिक हंगामे के आसार तेज

चुनाव आयोग ने बढ़ाई वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ की समय सीमा

नई दिल्ली, 29 नवम्बर,(एजेंसियां)। देशभर में चल रही वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ यानी Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद और बढ़ते दबाव के बीच चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला करते हुए इसकी अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब यह प्रक्रिया 14 फरवरी तक चलेगी। आयोग का कहना है कि इससे 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तैयार करने और प्रकाशन के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है और विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आक्रामक तेवर दिखाने की तैयारी में है।

हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों से बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) पर अत्यधिक दबाव, तनाव और यहां तक कि आत्महत्या की चिंताजनक घटनाओं की खबरें सामने आई थीं। इन घटनाओं ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ाई, बल्कि विपक्षी दलों को भी चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया में राहत देने की मांग उठाने का मौका दिया। इसी दबाव और व्यापक राजनीतिक माहौल को देखते हुए आयोग ने यह फैसला लिया है, जिसे अब चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

चुनाव आयोग द्वारा जारी तीन पन्नों के आदेश में कहा गया है कि राज्यों को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह और अंतिम सूची को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह विस्तार केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि शांति और व्यवस्थित ढंग से पुनरीक्षण कार्य पूरा करने की जरूरत से प्रेरित है। पहले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह प्रक्रिया 4 दिसंबर तक पूरी होने वाली थी और ड्राफ्ट लिस्ट का प्रकाशन 9 दिसंबर को होना था। समय सीमा बढ़ने से अब गिनती 11 दिसंबर तक चलेगी, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर को जारी होगी और अंतिम सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।

यह फैसला तब आया जब तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आयोग से मुलाकात की और SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि आयोग का शेड्यूल इतना तंग है कि BLOs को घर-घर जाकर यह भारी-भरकम कार्य पूरा करने में असहनीय दबाव झेलना पड़ रहा है। विपक्षी प्रतिनिधियों ने कहा कि कई BLO कई जिलों में लगातार डबल शिफ्ट में काम कर रहे हैं, जिससे वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से BLOs की आत्महत्या की खबरें सामने आईं, जिनमें से कुछ मामलों की जांच राज्य प्रशासन कर रहा है। इस स्थिति ने चुनाव अधिकारियों पर प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा और राहत प्रदान करने का दबाव बढ़ा दिया।

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पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए वहां SIR प्रक्रिया अधिक संवेदनशील मानी जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि BLOs पर पड़ने वाला दबाव चुनाव प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और यह पारदर्शिता के लिए खतरा साबित हो सकता है। चुनाव आयोग ने इन चिंताओं पर संज्ञान लेते हुए समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि BLOs बिना अनावश्यक तनाव के अपना कार्य कर सकें और मतदाता सूची अधिक सटीक और त्रुटिरहित तैयार हो सके।

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SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए जाने वाले वोटरों की अनुमानित संख्या भी बढ़ा दी गई है। न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक चुनाव आयोग ने बताया है कि ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए जाने वाले मतदाताओं की संख्या लगभग 35 लाख के आसपास हो सकती है। इसमें 18.70 लाख ऐसे वोटर हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन नाम अभी भी सूची में मौजूद थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में डुप्लीकेट वोटर, पता न चल पाने वाले वोटर, तथा ऐसे मतदाता शामिल हैं जो स्थायी रूप से किसी दूसरे राज्य में जा चुके हैं। आयोग का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया वोटर लिस्ट को अधिक विश्वसनीय और अद्यतन बनाने के लिए आवश्यक है।

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हालांकि विपक्ष का आरोप है कि यह ‘सफाई’ सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती है। कई विपक्षी दलों का दावा है कि खास इलाकों में एक विशेष वर्ग के वोटों को हटाया जा रहा है जिससे चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है। तृणमूल, कांग्रेस, DMK, SP और अन्य दलों ने आरोप लगाया कि SIR की आड़ में मतदाता सूची में ‘लक्षित बदलाव’ किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार है और हर चरण में राजनीतिक दलों को निरीक्षण और आपत्ति दर्ज करने का अवसर मिलेगा।

इस बीच, संसद में शीतकालीन सत्र शुरू होने के साथ ही इस मुद्दे पर भारी हंगामे के आसार हैं। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह BLOs पर पड़ने वाले भारी दबाव, कथित कुप्रबंधन और मतदाता सूची से संभावित ‘अनुचित हटाए जाने’ के मामलों को संसद में जोरदार तरीके से उठाएगा। भाजपा का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया चुनाव की शुचिता बनाये रखने का हिस्सा है और विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रहा है।

चुनाव आयोग की ओर से की गई समय सीमा बढ़ोत्तरी से अब राज्यों को मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। आयोग का कहना है कि यह अतिरिक्त समय सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से न छूटे और कोई भी अपात्र नाम अनावश्यक रूप से बरकरार न रहे। यह भी कहा गया है कि डिजिटल सत्यापन और डेटा मिलान की प्रणाली के कारण इस बार वोटर लिस्ट पहले से अधिक सटीक होगी।

कुल मिलाकर, चुनाव आयोग का यह कदम SIR प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान और बढ़ेगा। विपक्ष जहां इसे ‘लोकतंत्र पर प्रहार’ बता रहा है, वहीं सरकार और आयोग इसे ‘चुनावी सुधार’ और पारदर्शिता का हिस्सा मान रहे हैं। इन टकरावों के बीच, 14 फरवरी को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची आने वाले चुनावों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।