कश्मीर की ओर पर्यटकों का रुख, पर लद्दाख को इंतजार
जम्मू, 29 जून (ब्यूरो)। पहलगाम नरसंहार और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के कारण कश्मीर से लापता हुए पर्यटक फिर से लौटने तो लगे हैं पर बर्फीले रेगिस्तान लद्दाख को अभी भी उस भीड़ का इंतजार है जो कभी हुआ करती थी। हालांकि लद्दाखियों को टूरिज्म सेक्टर से जुड़े उन लोगों से नाराजगी तो जरूर है जिन्होंने चलो कश्मीर की तो मुहिम छेड़ी पर लद्दाख को याद नहीं किया।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, लद्दाख में अप्रैल में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जबकि मई में यह संख्या स्थिर रही और जून में पर्यटकों के आगमन में लगभग 60 फीसदी की नाटकीय गिरावट देखी गई। इस पूरी तस्वीर से पता चलता है कि सुरक्षा चिंताओं, अंतरराष्ट्रीय विकास और अपर्याप्त प्रचार सहित कई कारकों ने क्षेत्र की पर्यटन-निर्भर अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल लेह में पर्यटकों की संख्या में मिला-जुला रुझान देखने को मिला है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 में पर्यटकों की संख्या अप्रैल 2024 के 14,235 से बढ़कर 25,686 हो गई। यह 80 फीसदी की बढ़ोतरी है। हालांकि, मई में यह संख्या लगभग वैसी ही रही, पिछले साल के 29,497 से मामूली गिरावट के साथ इस साल 29,353 हो गई।
सबसे उल्लेखनीय गिरावट जून में देखी गई, जहां पर्यटकों की संख्या 2024 में 1,53,711 से घटकर 2025 (25 जून तक) में सिर्फ 61,927 रह गई। यह लगभग 60 फीसदी की कमी को दर्शाता है। इसके अलावा, पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2024 तक कुल 376,386 पर्यटक लद्दाख आए, जबकि जनवरी से 25 जून 2025 के बीच 127,437 पर्यटक आए। हालांकि, अधिकतर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों ने अप्रैल और मई की अपनी यात्राएं रद्द कर दी थीं। दूसरी ओर, घरेलू पर्यटक आमतौर पर पहले से बुकिंग नहीं कराते हैं। कई लोग गर्मी से बचने के लिए लद्दाख आ रहे हैं। हालांकि कुछ को यहां का मौसम अभी भी गर्म लग रहा है।
टूर ऑपरेटर त्सेरिंग दादुल कहते हैं कि पर्यटन विभाग को अपने प्रचार प्रयासों में सुधार करने की जरूरत है। चूंकि कई पर्यटक अपना खुद का वाहन चलाकर आ रहे हैं, इसलिए इससे स्थानीय परिवहन क्षेत्र को कोई फायदा नहीं हो रहा है। फिर भी, पिछले दो महीनों की तुलना में अब स्थिति बेहतर है। उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद है। वे कहते हैं कि इजराइल से कई अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों ने चल रहे युद्ध के कारण अपनी योजनाएं रद्द कर दी हैं। कुछ का कहना है कि उनका दूतावास जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है क्योंकि लद्दाख एक सीमावर्ती क्षेत्र है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद, उन्हें स्थिति पूरी तरह से सुरक्षित और शांतिपूर्ण जरूर लगी थी।