फिर वोटर लिस्ट में पाए गए तीन लाख घुसपैठिए

बिहार में 3 लाख वोटरों की नागरिकता पर संदेह, नोटिस जारी

फिर वोटर लिस्ट में पाए गए तीन लाख घुसपैठिए

वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए 1.98 लाख आवेदन

पटना, 30 अगस्त (एजेंसियां)। बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की जांच में चुनाव आयोग ने दस्तावेजों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद 3 लाख वोटरों को नोटिस भेजी है। अधिकारियों ने एक हफ्ते के भीतर उन्हें कागजात दिखाने को कहा है। आशंका जताई जा रही है कि ये लोग अवैध प्रवासी हैं। इस तरह बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की विशेष जांच (एसआईआरमें फिर बड़ा खुलासा हुआ। चुनाव आयोग (ईसीकी जांच में तीन लाख वोटरों के दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। यह संख्या और भी बढ़ सकती हैक्योंकि अभी भी दस्तावेजों की जांच चल रही है। जांच के दौरान ऐसे कई वोटर मिले हैंजिनके भारतीय नागरिक होने पर शक है। खासकर नेपालबांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों के वोटर बनने की आशंका जताई जा रही है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिकजिन लोगों को नोटिस भेजी गई हैउन्होंने या तो कोई दस्तावेज जमा नहीं किया या गलत दस्तावेज दिए। कुछ मामलों में तो वोटर की नागरिकता ही संदिग्ध पाई गई है। यह जानकारी बूथ लेवल अफसर (बीएलओऔर पुलिस से मिली है। नोटिस में कहा गया है कि उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियां पाई गई हैंजिससे इस बात पर शक होता है कि उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल होना चाहिए या नहीं।

जानकारी के अनुसारज्यादातर नोटिस पूर्वी और पश्चिमी चंपारणमधुबनीकिशनगंजपूर्णियाकटिहारअररिया और सुपौल जिलों में भेजे गए हैं। ये इलाके सीमांचल क्षेत्र में आते हैंजिनकी सीमाएं खुली हैं। भाजपा जैसे राजनीतिक दलों ने इस इलाके में बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के अवैध रूप से बसने का आरोप लगाया है। हालांकिकुछ पार्टियां इसे शिक्षा की कमी और बाढ़ की वजह से दस्तावेज खोने का मामला बता रही हैं। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि बिना सुनवाई के किसी भी वोटर का नाम लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। सभी संदिग्ध लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि इन 3 लाख लोगों में से ज्यादातर का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं था। उनके आधार कार्ड और बाकी दस्तावेजों में भी नाम और पता मेल नहीं खा रहा था।

बिहार में कुल 7.89 करोड़ वोटर थेजिनमें से पहले चरण की जांच में ही 65 लाख नाम हटा दिए गए। हटाए गए नामों में या तो मर चुके थेया कहीं और चले गए थेया फिर एक से ज्यादा जगह पर नाम रजिस्टर्ड थे। चुनाव आयोग ने कहा है कि अब तक 1.98 लाख लोगों ने खुद ही अपना नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आवेदन किया है। मात्र 29879 लोगों ने सूची में नाम जोड़ने की मांग की है। मतदाता सूची प्रारूप प्रकाशित होने के 30 दिन बाद दो राजनीतिक दल को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल की ओर से दावा या आपत्ति नहीं की गई है। चुनाव आयोग ने शनिवार को मतदाता पुनरीक्षण कार्य का डेली बुलेटिन जारी किया। चुनाव आयोग के अनुसारकम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडियामार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट (लिबरेशन) की ओर से 10 आपत्ति दर्ज करवाई गई है। इनके बीएलए की संख्या 1496 है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद की ओर से 10 आपत्तियां दर्ज करवाई गई है। इनके बीएलए की संख्या 47,506 है।

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आयोग के अनुसारबूथ लेवल एजेंट्स (बीएलएने अब तक 25 नाम जोड़ने और 103 नाम हटाने के लिए आवेदन किए हैं। फिलहाल 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.11 फीसदी लोगों ने अपने दस्तावेज सत्यापन के लिए जमा कर दिए हैं।बिहार की अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि नाम जुड़वाने के लिए आधार कार्ड के अलावा 11 अन्य दस्तावेजों को भी मान्य किया जाए। वहींचुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत से भरोसा जताने की अपील करते हुए कहा है कि बिहार में विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से कराई जा रही है।

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भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल कुणाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बहुत बड़ी साजिश रच रहा है। हमलोगों ने अब तक 100 से अधिक आपत्तियां दर्ज करवाई है। लेकिनरिकॉर्ड में केवल 10 ही दिखाया गया है। पहले दिन ही भोजपुर में 13 आपत्ति किए थे। इसमें 10 नए नाम जोड़ने और 3 कटे हुए नाम पर थे। इसको चुनाव आयोग ने दो ही गिना। अब तक हमने 100 से अधिक दावे आपत्तियां दर्ज कराए। इसमें से महज 10 ही गिना गया।

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