'सियासी' जजों के चेहरे से नकाब हटना जरूरी

 23वें लॉ कमीशन के सदस्य हितेश जैन ने बेबाकी से कहा

 'सियासी' जजों के चेहरे से नकाब हटना जरूरी

नई दिल्ली, 29 अगस्त (एजेंसियां)। विपक्षी गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के मुद्दे पर भारतीय न्यायपालिका दो धड़ों में बंटती दिखाई दे रही है। दरअसल सुदर्शन रेड्डी को लेकर अमित शाह ने जो बयान दिया थाउस पर कुछ रिटायर्ड जजों ने आपत्ति जताई थी। अब उन जजों के जवाब में 56 अन्य पूर्व जजों ने खुला पत्र लिखा हैजिसमें कहा गया है कि राजनीतिक बयानों से न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान हो रहा है। 23वें लॉ कमीशन के सदस्य हितेश जैन ने भी सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करने वाले पूर्व जजों के प्रति नाराजगी जाहिर की है। हितेश जैन ने कहा, हाल ही में जस्टिस अभय ओका के कुछ इंटरव्यू पढ़े और मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई कि उन्होंने भी जस्टिस सुदर्शन रेड्डी के समर्थन में लिखे पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

हितेश जैन ने कहा कि ऐसा ट्रेंड चल रहा है कि ज्यादा से ज्यादा रिटायर्ड जज खुलकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तरह व्यवहार कर रहे हैं और ये बात मुझे परेशान करती है। हितेश जैन ने कई पूर्व जजों के नाम लेकर दावा किया कि न्यायिक आजादी के सैद्धांतिक रुख के बजायये जज पक्षपाती हो रहे हैं। जैन ने लिखा न्यायिक आजादीप्रेस कॉन्फ्रेंस करनेइंटरव्यू देने या पक्षपाती पत्रों के जरिए सुरक्षित नहीं रहतीबल्कि इसके लिए जिला अदालतों और मजिस्ट्रेट अदालतों की हर दिन की कार्यवाही देखी जाती हैंजहां लाखों लोगों के भाग्य का फैसला होता है।

हितेश जैन ने कुछ रिटायर्ड जजों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये वही न्यायाधीश हैंजो अब लोकतंत्र के संरक्षक होने का दावा करते हैंलेकिन असल मुद्दों जैसे निचली अदालतों की स्थितिनियुक्तियों में देरी और आम नागरिकों को न्याय मिलने की स्थिति पर चुप रहे। लॉ कमीशन के सदस्य जैन ने आरोप लगाया कि जो रिटायर्ड जज बार-बार न्यायिक पदोन्नति और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित कुछ मामलों पर सवाल उठाते हैंवे निचली अदालतों में लंबित मुकदमोंसुनवाई में कैसे तेजी लाई जाए और न्याय को कैसे सुलभ बनाया जाएइस पर कभी बात नहीं करते।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये जज न्यायपालिका के बड़े मुद्दों के समाधान के लिए कोई रचनात्मक समाधान लेकर आएया अपने अनुभवों से आम लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए कुछ कियारिकॉर्ड में भाषणों के अलावा कुछ नहीं है। हितेश जैन ने कुछ वरिष्ठ वकीलों के नाम लेकर कहा कि ये लोग खुद को न्यायिक कार्यकर्ता बताते हैंलेकिन अगर कोई न्यायिक पदोन्नति उनके अनुरूप न हो तो वे मीडिया के पास पहुंच जाते हैं और छाती पीटते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है। हितेश जैन ने आरोप लगाया कि यह लॉबी हर मोड़ पर झूठ का राग अलापती है और इनकी चिंता न्यायपालिका के प्रति नहीं बल्कि अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की है। इन्हें स्पष्ट संदेश देना जरूरी है कि वे न्यायपालिका को धमका नहीं सकते और इसे ढाल के रूप में भी इस्तेमाल नहीं कर सकते। अब समय आ गया है कि इस लॉबी को बेनकाब किया जाए। कई पूर्व जजों का नाम लेकर हितेश जैन ने कहा कि ये राजनीतिक लॉबी का हिस्सा हैंजिनका उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाना है। ऐसे सक्रिय न्यायाधीशों के चेहरे से नकाब हटाना जरूरी है।

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