संभल हिंसा के पीछे सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क का हाथ
उच्चस्तरीय जांच समिति ने सीएम योगी को सौंपी 450 पन्ने की रिपोर्ट
हिंदुओं पर हमला करने और तीर्थ स्थलों पर कब्जा करने की थी साजिश
लखनऊ, 29 अगस्त (एजेंसियां)। उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच के लिए गठित की गई तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति ने 450 पन्नों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। इस जांच रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह दंगा अचानक नहीं भड़का बल्कि इसे पूर्वनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। इसमें कई राजनीतिक और मजहबी किरदारों की भूमिका रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने 22 नवंबर को नमाजियों को संबोधित करते हुए कहा था, हम इस देश के मालिक हैं, नौकर-गुलाम नहीं। मस्जिद थी, है और कयामत तक रहेगी। अयोध्या में हमारी मस्जिद ले ली गई, यहां ऐसा नहीं होने देंगे। इस भाषण का कन्वर्टेड हिंदू पठानों ने विरोध किया, जिससे तुर्क और पठान समुदाय आमने-सामने आ गए। 24 नवंबर को यही तनाव हिंसा में बदल गया। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस साजिश में सांसद बर्क, विधायक के बेटे सुहैल इकबाल और जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी की बड़ी भूमिका रही थी। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि दंगे की आड़ में 68 तीर्थ स्थलों और 19 पावन कूपों पर कब्जे की कोशिश की गई। हरिहर मंदिर को भी निशाना बनाया गया, जिसने बाबर काल की यादें ताजा कर दीं। हरिहर मंदिर को भी निशाना बनाया गया था।
योगी सरकार ने इन स्थलों के पुनरुद्धार की योजना बनाई और 30 मई 2025 को इसका शिलान्यास किया। दंगे को बढ़ाने के लिए बाहरी उपद्रवियों को बुलाया गया और हिंदू मोहल्लों को निशाना बनाने की योजना बनाई गई लेकिन पुलिस की कड़ी तैनाती से यह मंसूबा विफल हो गया। फिर भी, तुर्क और पठान समुदायों के बीच हुई क्रॉस फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक 1936 से 2019 तक यहां 73 दिन कर्फ्यू लगा, जिसमें 1948 में 20 दिन, 1978 में 30 दिन और 2019 में सीएए हिंसा के दौरान 6 दिन शामिल हैं। रिपोर्ट में संभल को आतंकी संगठनों और अवैध हथियारों का अड्डा बताया गया है। अलकायदा और हरकत-उल-मुजाहिदीन की गतिविधियों का जिक्र है और अमेरिका द्वारा आतंकी घोषित मौलाना आसिम का कनेक्शन भी संभल से जुड़ा बताया गया है। संभल में जनसंख्या (डेमोग्राफी) में भी बड़ा बदलाव हुआ है। आजादी के समय 55 प्रतिशत मुस्लिम और 45 प्रतिशत हिंदू थे लेकिन अब हिंदू घटकर 15 प्रतिशत और मुस्लिम बढ़कर 85 प्रतिशत हो गए हैं। 1947 से 2019 तक यहां 15 बड़े दंगे हुए जिनका सबसे ज्यादा असर हिंदू समाज पर पड़ा है।
उत्तर प्रदेश के संभल स्थित कथित शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा ने पूरे देश का ध्यान खींचा। कट्टरता से ओतप्रोत हजारों की कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस की टीम पर जानलेवा हमला किया। जबावी कार्रवाई में तीन लोगों की मौत हुई और कई घायल हो गए थे। अब उसी हिंसा को लेकर चौंकाने वाला खुलासा पुलिस की चार्जशीट में हुआ है। चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि हिंसा के दौरान कट्टरपंथियों ने पाकिस्तान समेत कई और देशों द्वारा निर्मित विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया था। इसके साथ ही इसमें दुबई में बैठे शारिक साठा नाम के शख्स का नाम सामने आया है।
संभल की कथित शाही जामा मस्जिद का सर्वे कोर्ट के आदेश पर हुआ। हिंदू संगठनों का दावा है कि जिस स्थान को मुस्लिम समुदाय मस्जिद कह रहा है, असल में वो कभी हरिहर मंदिर था। बस इसी को जांचने के लिए सर्वे किया जा रहा था। 19 नवंबर को पहला सर्वे शांति से हुआ, लेकिन 24 नवंबर को दूसरा सर्वे शुरू होते ही माहौल बिगड़ गया। सर्वे के दौरान वजूखाने (नमाज से पहले हाथ-पैर धोने की जगह) को खाली करने की अफवाह फैली, जिससे गुस्साए लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। भीड़ ने पुलिस पर गोलीबारी की, गाड़ियां जलाईं और हालात बेकाबू हो गए। पुलिस को आंसू गैस और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल करना पड़ा। इस हिंसा में नईम, बिलाल और नोमान नाम के तीन युवकों की मौत हुई, जबकि 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी और एक डिप्टी कलेक्टर घायल हुए।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम की जांच में पता चला कि हिंसा में विदेशी हथियारों का इस्तेमाल हुआ। घटनास्थल से छह कारतूस के खोखे मिले, जिनमें से एक पर पीओएफ (पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री) लिखा था। दूसरा कारतूस .32 बोर का था, जिस पर मेड इन यूएसए लिखा था। इसके अलावा, एक 9 एमएम का कारतूस चेकोस्लोवाकिया और एक ब्रिटिश मूल का भी मिला। ये खुलासा चौंकाने वाला था, क्योंकि संभल जैसे छोटे शहर में विदेशी हथियारों का इस्तेमाल साजिश की ओर इशारा करता है। पुलिस अब विदेशी फंडिंग और हथियारों की तस्करी की जांच कर रही है।
चार्जशीट में शारिक साठा का नाम मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर आया है। पुलिस के मुताबिक, शारिक ने हिंसा को भड़काने के लिए हथियार सप्लाई किए। वह दुबई में बैठकर जंगी ऐप के जरिए अपने गुर्गों को निर्देश दे रहा था। शारिक के साथी गुलाम को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिसके पास से 9 एमएम की पिस्तौल, दो .32 बोर की पिस्तौल और 15 जिंदा कारतूस बरामद हुए। गुलाम ने बताया कि शारिक ने सर्वे को रोकने और एक वकील को निशाना बनाने की साजिश रची थी। गुलाम के मोबाइल से सोने की तस्करी और हिंसा से जुड़े वीडियो भी मिले।
पुलिस ने इस मामले में 79 लोगों को गिरफ्तार किया है। सात एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें सांसद जियाउर रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे नवाब सुहैल इकबाल का नाम भी शामिल है। पुलिस ने हिंसा में शामिल लोगों के मोबाइल नंबरों की जांच शुरू की और संसद संभल नाम के वाट्सएप ग्रुप से हिंसा भड़काने के सबूत मिले। पुलिस का कहना है कि यह हिंसा सुनियोजित थी, और इसमें बाहरी ताकतों का हाथ हो सकता है।
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