देश में आबादी का संतुलित होना बेहद जरूरी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्मेलन में मोहन भागवत ने कहा
स्पष्ट जनसंख्या नीति पर संघ प्रमुख का जोर
नई दिल्ली, 29 अगस्त (एजेंसियां)। विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष में आयोजित तीन दिवसीय संवाद के अंतिम दिन प्रश्नोत्तर सत्र को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, बढ़ती हुई जनसंख्या देश के लिए बोझ और अवसर दोनों है। जनसंख्या नीति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें आबादी की जरूरत को पूरा करने के साथ इसे नियंत्रित भी किया जा सके और संपूर्ण आबादी का ठीक से पालन-पोषण हो सके। इस नीति से देश की जरूरत और आबादी के बीच बेहतर संतुलन कायम होना चाहिए।
संघ प्रमुख ने कहा, शास्त्र के साथ विज्ञान भी यह कहता है कि जन्मदर उचित होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित वर्ग या समाज विलुप्त हो जाता है। इसी नीति के तहत सभी देश एक दंपति के कम से कम तीन बच्चों के सिद्धांत या नीति पर आगे बढ़ रहे हैं। संघ प्रमुख ने कहा, नई परिस्थितियों में देश के हर वर्ग, समुदाय, धर्म की जन्म दर घटी है, लेकिन सबसे तेज गिरावट हिंदुओं के जन्म दर में आई है। उन्होंने कहा कि आबादी अधिक बढ़ने पर इसे नियंत्रित करने के लिए प्रकृति भी अपना काम करती है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक दंपति के तीन बच्चे की वकालत करते हुए कहा कि जिस समाज में परिवारों के तीन से कम संतानें हों, उनका अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। उन्होंने आबादी नियंत्रण के साथ पर्याप्त जनसंख्या को भी देश के लिए जरूरी बताया। संघ प्रमुख ने कहा, देश की जनसंख्या नीति के मुताबिक एक दंपति के पास 2.1 बच्चे चाहिए। गणित में 2.1 का मतलब दो होता है। मगर सामाजिक जीवन में 2.1 का अर्थ कम से कम तीन बच्चों का है। रिसर्च बताते हैं कि तीन बच्चों वाले परिवार में मां-बाप और संतान अधिक स्वस्थ रहते हैं। स्वास्थ्य अध्ययन के मुताबिक इसके कारण परिवार में अहम की लड़ाई कम होती है। बच्चे ईगो मैनेजमेंट सीख जाते हैं।
मोहन भागवत ने कहा, भारत की जनसंख्या नीति 2.1 बच्चों की बात करती है, जिसका अर्थ है कि एक परिवार में तीन बच्चे। हर नागरिक को यह देखना चाहिए कि उसके परिवार में तीन बच्चे हों। उन्होंने कहा, सभी नागरिकों को तीन बच्चे पैदा करने पर विचार करना चाहिए, जिससे जनसंख्या पर्याप्त हो और कंट्रोल में भी रहे। भारत की जनसंख्या नीति का जिक्र करते हुए, आरएसएस प्रमुख ने कहा, हमारे देश की जनसंख्या नीति 1998 या 2002 में बनाई गई थी, और उसमें साफ तौर से जिक्र किया गया था कि किसी भी समुदाय की जनसंख्या 2.1 से कम नहीं होनी चाहिए। कोई आंशिक बच्चे नहीं पैदा कर सकता, इसलिए जनसंख्या विज्ञान के मुताबिक, हमें प्रति परिवार कम से कम तीन बच्चों की जरूरत है। संघ प्रमुख ने कहा कि भारतवर्ष में प्रत्येक हिंदू नागरिक के घर में तीन बच्चे होने चाहिए, यह मैं देश की दृष्टि से कह रहा हूं। जनसंख्या नियंत्रित भी रहे और जनसंख्या संतुलित भी रहे। जन्मदर सबका कम हो रहा है। लेकिन हिंदुओं का पहले से ही कम था, अब और कम हो रहा है। इसलिए हर हिंदू परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के इस सारगर्भित कथन पर कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष अजय राय ने नासमझी से भरा फूहड़ वक्तव्य जारी किया। अजय राय ने कहा, संघ के लोगों को पहले खुद शादी करनी चाहिए। फिर उन्हें देश के लोगों को नसीहत देनी चाहिए। संघ प्रमुख को दिशा निर्देश लागू करना चाहिए कि संघ के लोग तत्काल शादी करें और बच्चे पैदा करें। अजय राय ने कहा, आरएसएस के लोग पूरी तरीके से रंडुवे हैं। आरएसएस में नीचे से ऊपर तक रंडुओं की फौज भरी हुई है। अजय राय का इतने पर भी मन नहीं भरा तो उन्होंने कहा, आरएसएस में महिलाओं का सम्मान नहीं होता है। फिर अजय राय ने बड़ी बेशर्मी से संघ प्रमुख को भी शादी करने की नसीहत दे डाली।
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