बाहरी हो या भीतरी, अब असम में आसानी से नहीं खरीद पाएंगे जमीन

 असम सरकार ने लागू की नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)

बाहरी हो या भीतरी, अब असम में आसानी से नहीं खरीद पाएंगे जमीन

समान धर्म में ही हो सकेगा जमीन ट्रांसफर

गुवाहाटी, 28 अगस्त (एजेंसियां)। असम में जनसांख्यिकीय बदलाव और संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए असम सरकार ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीड्योर) को मंजूरी दी है। यह प्रक्रिया अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच भूमि हस्तांतरण की जांच के लिए लागू की गई है। इसके अलावा असम के बाहर से आने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओद्वारा जमीन खरीदने की प्रक्रिया को भी इस प्रक्रिया के तहत जांचा जाएगा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में जमीन के लेन-देन को बहुत सावधानी से संभालना जरूरी हैताकि कोई धोखाधड़ी न हो और समाज में शांति बनी रहे। अगर जमीन का ट्रांसफर (खरीद-बिक्री या दान) एक ही धर्म के लोगों के बीच हो रहा हैतो इस प्रक्रिया का कोई असर नहीं होगा और ऐसे सौदे बिना किसी अतिरिक्त रुकावट के हो सकेंगे। लेकिन अगर यह ट्रांसफर अलग-अलग धर्मों के बीच होजैसे हिंदू और मुस्लिम या इसके उलट, तो इसके लिए कई स्तरों पर जांच होगी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहाजब कोई प्रस्ताव सब-डिविजनल अफसर के पास आएगातो अगर यह एक ही धर्म के लोगों के बीच का सौदा हैतो कोई दिक्कत नहीं। लेकिन अगर यह इंटर-रिलीजन सौदा हैजैसे हिंदू और मुस्लिम के बीच तो पहले यह जांचा जाएगा कि जमीन का मालिक असली है या नहींजमीन असली है या नहीं। इसके बाद प्रस्ताव डिप्टी कमिश्नर के पास जाएगा। डिप्टी कमिश्नर इस प्रस्ताव को राजस्व विभाग को भेजेगा। वहां से यह असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच को जाएगा। स्पेशल ब्रांच यह देखेगी कि कहीं यह सौदा जबरदस्तीधोखाधड़ी या गैरकानूनी तो नहीं है। साथ ही खरीदार के पैसे का स्रोत भी जांचा जाएगा कि वह काला धन तो नहीं है। इसके अलावा स्थानीय लोगों की राय भी ली जाएगी कि वे इस सौदे से सहमत हैं या नहींखासकर जब जमीन किसी अलग धर्म के व्यक्ति को बेची जा रही हो।

मुख्यमंत्री ने कहास्पेशल ब्रांच यह भी देखेगी कि इस सौदे से स्थानीय सामाजिक ढांचे पर कोई बुरा असर तो नहीं पड़ रहा या इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा तो नहीं है। उनकी रिपोर्ट डिप्टी कमिश्नर को वापस भेजी जाएगीजो अंतिम फैसला लेगा कि सौदा मंजूर करना है या नहीं। स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगीजो डिप्टी कमिश्नर को अंतिम फैसला लेने के लिए कहेगी। सीएम सरमा ने कहा कि यह सख्त जांच जरूरी है ताकि धोखाधड़ी या गैरकानूनी कामपैसे के स्रोतस्थानीय सामाजिक ढांचे पर प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को ठीक से देखा जा सके। उन्होंने कहाप्रक्रिया के तहतअसम पुलिस की स्पेशल ब्रांच यह जांचेगी कि क्या भूमि हस्तांतरण में कोई धोखाधड़ी या गैरकानूनी काम हैखरीदार के पैसे का स्रोत क्या हैजमीन के आसपास के सामाजिक ढांचे पर क्या असर होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई मुद्दा तो नहीं है।

Read More अडाणी समूह और कोका कोला ने भी उद्योग के लिए ली जमीन

सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने यह भी बताया कि पिछले छह महीनों से रुके हुए कई भूमि हस्तांतरण के मामलों का अब इस नए ढांचे के तहत जल्दी निपटारा किया जाएगा। यह प्रक्रिया सिर्फ व्यक्तिगत सौदों तक सीमित नहीं है। असम के बाहर से आने वाले एनजीओ जो जमीन खरीदकर स्कूलकॉलेज या अन्य संस्थान बनाना चाहते हैंउन्हें भी इस प्रक्रिया के तहत जांच से गुजरना होगा। सीएम सरमा ने हाल के रुझानों पर चिंता जताईजहां कुछ एनजीओ ने असम में जमीन खरीदी है। उन्होंने कहाहाल ही में हमने देखा कि केरल से कुछ एनजीओ ने यहां जमीन खरीदी। उन्होंने कुछ आयोजन किएजो भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। अगर कोई बाहरी एनजीओ शिक्षण संस्थानमेडिकल कॉलेज या नर्सिंग कॉलेज के लिए जमीन खरीदना चाहता हैतो उसे भी इस प्रक्रिया की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

Read More चारमुडी घाट पर चलने वाले वाहनों के लिए नए नियम लागू

असम के मुख्यमंत्री ने खास तौर पर बराक वैलीश्रीभूमि और बरपेटा जैसे इलाकों का जिक्र कियाजहां बाहरी एनजीओजो अक्सर किसी खास धर्म से जुड़े होते हैंस्कूल या अन्य सुविधाओं के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन खरीद रहे हैं। उन्होंने कहावे कहते हैं कि वे स्कूल बनाना चाहते हैंलेकिन उनका असली मकसद कुछ और हो सकता है। पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया असम में रजिस्टर्ड एनजीओ पर लागू नहीं होगी। यह सिर्फ बाहरी एनजीओ पर लागू होगीताकि किसी भी अनुचित प्रभाव या छिपे मकसद को रोका जा सके। उन्होंने दोहरायाअसम जैसे संवेदनशील राज्य में भूमि हस्तांतरण के मुद्दे को बहुत सावधानी से संभालना जरूरी है। इस नीति का मकसद राज्य के जनसांख्यिकीय संतुलन को बनाए रखना और राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी भी खतरे से बचाना है।

Read More केएसआरटीसी बस के बस शेल्टर से टकराने से बच्चे समेत पांच की मौत, ७ घायल

सीएम सरमा ने यह भी जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असम यात्रा पहले 8 सितंबर को होने वाली थीलेकिन वह उपराष्ट्रपति चुनाव के कारण टल गई है। इसलिए पीएम मोदी अब 13 सितंबर को असम आएंगे। पीएम मोदी डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह का उद्घाटन करेंगे और कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।

उल्लेखनीय है कि असम में घुसपैठ पर सख्ती बरतने के तहत सरकार ने 18 वर्ष से ऊपर के लोगों का आधार कार्ड बनने पर रोक लगा दी है। राज्य में आधार सैचुरेशन 103 प्रतिशत हो गया है। यानि कोई भी 18 वर्ष से ऊपर का व्यक्ति बिना आधार कार्ड के नहीं बचा है। इसलिए असम सरकार ने फैसला किया है कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का अब आधार कार्ड नहीं बनाया जाएगा। केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटीऔर चाय बागान समुदाय से जुड़े लोग अगले एक वर्ष तक आधार कार्ड बनवा सकेंगे।

असम में बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ एक बड़ी समस्या है। घुसपैठिए स्थानीय लोगों की मदद से आधार कार्ड जैसे दस्तावेज बनवा लेते हैं और फिर उनका इस्तेमाल कर अन्य कागजात भी उन्हें मिल जाते हैं। सीएम हिमंत के इस फैसले के बाद अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के लिए असम में आधार कार्ड हासिल करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वैसे ही असम भीषण जनसंख्या असंतुलन की समस्या से गुजर रहा है। सीएम सरमा ने यह आशंका जताई है कि राज्य में 2041 तक मुस्लिम जनसंख्या हिंदुओं के बराबर हो जाएगी। वर्ष 2011 में असम की कुल जनसंख्या 3.12 करोड़ थीजिसमें मुस्लिम जनसंख्या 1.07 करोड़ (लगभग 34.22 प्रतिशत) और हिंदू जनसंख्या 1.92 करोड़ (लगभग 61.47 प्रतिशत) थी। असम में रहने वाले महज 3 प्रतिशत मुस्लिम ही असमिया मूल के हैं जबकि 31 प्रतिशत मुस्लिम आबादी घुसपैठिए हैं जो मुख्यतः बांग्लादेश से आए हैं। अगर इसी तरह चलता रहा तो 2031 और 2041 तक असम की जनसंख्या में 50 फीसदी तबका मुस्लिम होगा और हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक बन जाएगा। 2001 में असम के 23 जिलों में से 6 मुस्लिम बहुल थे। इनमें धुबरी (74.29)गोलपारा (53.71)बारपेटा (59.37)नगांव (51)करीमगंज (52.3) और हैलाकांडी (57.63) थी। 2011 में जिलों की संख्या 27 हुई और इनमें 9 जिले मुस्लिम बहुल हो गए।

सीएम सरमा ने जनसांख्यिकीय बदलाव पर कहा कि यह सिर्फ भूमि जेहाद ही नहीं बल्कि असम को खत्म करने वाला जेहाद है। योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम आबादी सरकारी और जंगलों की जमीन पर भी कब्जा कर रही है। इसके कारण असम की सांस्कृतिकसामाजिक और राजनीतिक पहचान खतरे में पड़ गई है। अगर यही प्रवृत्ति जारी रही तो अगले 20 वर्षों में असम के मूल निवासी अल्पसंख्यक बन सकते हैं।

असम में घुसपैठ से निपटने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। जिनमें बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानकर वापस उनके देश भेजना और घुसपैठियों द्वारा जबरन कब्जाई गई जमीन को खाली कराना जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। असम में लगभग 29 लाख बीघा जमीन पर बांग्लादेशी घुसपैठिए और संदिग्ध नागरिकों का कब्जा है। 2021 में जमीन खाली कराने की योजना शुरू की गई थी जिसके तहत अब तक 77,420 बीघा जमीन को अतिक्रमण से साफ कर दिया गया है। इसमें अधिकतर बंगाल के मुस्लिमों का कब्जा था। दरंग जिले में अभियान की सफलता के बाद बोरसोल्लालुमडिंगबुरहापहाड़पाभाबतद्राचापर और पैकन में भी इस अभियान को चलाया गया। पिछले 4 वर्षों में हमने 1.29 लाख बीघा कब्जे वाली जमीन को मुक्त कराया है। अब इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा जंगल बनाने के लिए और प्रदेश की जनता के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।

 

#Assam, #AssamGovernment, #NewSOP, #StandardOperatingProcedure, #IndiaNews, #AssamUpdates, #GovernmentPolicy, #BreakingNews