सीएम मृतकों के परिजनों ने एलजी के खिलाफ खोला मोर्चा
वैष्णो देवी हादसे पर बढ़ती जा रही रार
एलजी के बचाव में श्राइन बोर्ड मैदान में आया
जम्मू, 29 अगस्त (ब्यूरो)। वैष्णो देवी हादसे पर रार बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और मृतकों के परिजनों द्वारा जो मोर्चा श्राइन बोर्ड के सर्वोसर्वा उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के खिलाफ खोला गया है अब उनके बचाव में श्राइन बोर्ड आ गया है। जो अभी भी यह जवाब नहीं दे पा रहा है कि अगर उसने यात्रा को स्थगित किया था तो इतने श्रद्धालु हादसे वाले स्थान का इस्तेमाल क्यों कर रहे थे।
वैष्णो देवी मार्ग पर हुई घटना को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने इस हादसे के लिए श्राइन बोर्ड को जिम्मेदार ठहराया था। दरअसल वैष्णो देवी यात्रा में रूट से लेकर यात्रा कब तक चलेगी और कब बंद रहेगी, किस समय कौन दर्शन करेगा क्या व्यवस्था बनाई जाएगी, इन सबकी जिम्मेदारी श्राइन बोर्ड के पास है। यही कारण है कि हादसे के बाद कई तरह के सवाल श्राइन बोर्ड पर उठाए गए है। इसमें पूछ गया कि भक्तों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ क्यों किया गया? मौसम का अलर्ट होते हुए भी यात्रा रोकी क्यों नहीं गई? बोर्ड की तरफ से कहा गया कि मौसम की जानकारी लगते ही सिर्फ रजिस्ट्रेशन बंद कर दिए गए थे।
वैष्णो देवी हादसे के बाद श्राइन बोर्ड पर सीएम उमर समेत सरकार के लोगों ने आरोप लगाए थे। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सवाल उठाया है कि जब आपदा की चेतावनी दी गई थी, तब अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों को क्यों नहीं रोका गया। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग ने 25 और 26 अगस्त के लिए जम्मू कश्मीर में भारी बारिश, बादल फटने और लैंडस्लाइड का अलर्ट जारी किया था। अगले 7 दिन भी भारी बारिश की चेतावनी दी थी। इतनी क्लियर एडवाइजरी के बावजूद श्राइन बोर्ड ने यात्रा नहीं रोकी थी। विधायक बलदेव राज शर्मा ने भी कहा कि ये श्राइन बोर्ड की भूल है। इस भूल का नतीजा ये निकला है।
वैसे आरोपों का खंडन करते हुए श्राइन बोर्ड ने अपना जवाब दिया है। श्राइन बोर्ड की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि मौसम विभाग की किसी भी चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया गया था। बोर्ड का दावा था कि 26 अगस्त को बादल फटने और भूस्खलन से पहले ही दोपहर में तीर्थयात्रा स्थगित कर दी गई थी। हालांकि, अभी तक श्राइन बोर्ड ने इस आपदा में हुई मौतों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। मृतकों के स्वजन इस घटना से आहत हैं। उनका कहना है कि उन्हें किसी ने भी आगे के खतरे के बारे में सतर्क नहीं किया। जीएमसी जम्मू में अपनी सास रत्ना बाई का शव लेने पहुंची ममता ने बताया कि वे मध्य प्रदेश के मन्दसौर के रहने वाले हैं। एक ही गांव के हम सात लोग यात्रा के लिए आए थे। लेकिन उनकी सास रत्ना बाई और एक अन्य रिश्तेदार फकीर चंद की इस हादसे में मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दिन तेज बारिश हो रही थी। लेकिन किसी ने भी उन्हें यात्रा में जाने से नहीं रोका। किसी ने भी यह नहीं कहा कि इस प्रकार मौसम खराब हो सकता है। हम सभी साथ ही चल रहे थे। अर्द्वकुंवारी में जब यह हादसा हुआ तो मैं थोड़ा सा आगे चल रही थी। अचानक एक पत्थर शेड पर गिरा जिसमें उनके परिवार के अन्य सदस्य व गांव वाले भी आ गए। कुछ पता ही नहीं चला। अचानक हुए इस हादसे के बाद मैं अपने साथ आए सभी को ढूंढ़ने में जुट गई। चार दिनों से यात्रा स्थगित होने से कटड़ा में रुके श्रद्धालुओं की सहायता के लिए होटल व रेस्तरां संघ के साथ ही कटड़ा चैंबर व अन्य व्यापारिक संगठन आगे आए हैं। होटल व रेस्तरां संघ के प्रधान राकेश वजीर ने कहा कि जरूरतंद श्रद्धालुओं के लिए कटड़ा में होटल के साथ ही गेस्ट हाउस, धर्मशाला में ठहरने को लेकर निःशुल्क इंतजाम किए जा रहे हैं।
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