भारत-जापान साझेदारी विश्व शांति के लिए जरूरी : मोदी
सात साल बाद जापान पहुंचे पीएम मोदी का हुआ भव्य स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी व प्रधानमंत्री इशिबा के बीच हुई अहम वार्ता
जापान की व्यापारिक हस्तियों को भारत में निवेश का न्यौता
टोक्यो, 29 अगस्त (एजेंसियां)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार 29 अगस्त को दो दिन की जापान यात्रा पर टोक्यो पहुंचे। हानेडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का जोरदार स्वागत किया गया। जापान के लोगों ने गायत्री मंत्र गाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा से मुलाकात हुई। दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और तकनीकी क्षेत्रों सहित समग्र द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तारित करने पर बात की। शिखर वार्ता से पहले प्रधानमंत्री ने भारत-जापान व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा कि जापान की प्रौद्योगिकी और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकती है। जापान में प्रधानमंत्री मोदी का दौरा शनिवार 30 अगस्त तक चलेगा, इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी चीन के शहर तिआनजिन जाएंगे। वहां वे 31 अगस्त और 1 सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक भी होने की संभावना है।
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगली पीढ़ी की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाने की जरूरत है। वहीं जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने कहा कि छह साल पहले अगस्त में मुझे वाराणसी आने का सौभाग्य मिला था। मैं अनादि काल के भारतीय इतिहास को देखकर अभिभूत था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा और फुमियो किशिदा से भी मुलाकात की। जापान की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष फुकुशिरो नुकागा से भी प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत औऱ जापान में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। हमारा मानना है कि जापानी तकनीक और भारतीय प्रतिभा एक विजयी जोड़ी है। जहां हम हाई-स्पीड रेल पर काम कर रहे हैं। वहीं अगली पीढ़ी की मोबिलिटी साझेदारी के तहत हम बंदरगाहों, विमानन और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से प्रगति करेंगे। चंद्रयान 5 मिशन में सहयोग के लिए हम इसरो और जाक्सा के बीच हुए समझौते का स्वागत करते हैं। हमारा सक्रिय सहयोग पृथ्वी की सीमाओं को पार करेगा और अंतरिक्ष में मानवता की प्रगति का प्रतीक बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ऊर्जा के लिए हमारा संयुक्त ऋण तंत्र एक बड़ी जीत है। यह दर्शाता है कि हमारी हरित साझेदारी हमारी आर्थिक साझेदारी जितनी ही मजबूत है। इस दिशा में हम टिकाऊ ईंधन पहल और बैटरी आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी की भी शुरुआत कर रहे हैं। हम आर्थिक सुरक्षा सहयोग पहल शुरू कर रहे हैं। हम व्यापक दृष्टिकोण के साथ महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्रों में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग हम दोनों के लिए प्राथमिकता है। इस संबंध में डिजिटल साझेदारी 2.0 और एआई सहयोग पहल पर काम किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर और दुर्लभ मृदा खनिज हमारे एजेंडे में सबसे ऊपर होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमने अगले 10 वर्षों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का लक्ष्य रखा है। भारत और जापान के लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा। भारत-जापान व्यापार मंच में भी मैंने जापानी कंपनियों से कहा था कि भारत में बनाओ, दुनिया के लिए बनाओ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज हमारी चर्चा उपयोगी और उद्देश्यपूर्ण रही। हम इस बात पर सहमत हैं कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और जीवंत लोकतंत्रों के रूप में हमारी साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। मजबूत लोकतंत्र एक बेहतर दुनिया के निर्माण में स्वाभाविक साझेदार होते हैं। आज हमने अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में एक नए और सुनहरे अध्याय की नींव रखी है। हमने अगले दशक के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। हमारे विजन के केंद्र में निवेश, नवाचार, आर्थिक सुरक्षा, पर्यावरण, प्रौद्योगि
अमेरिका से टैरिफ वॉर के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की कंपनियों को भारत में निवेश का न्यौता दिया और कहा कि मेट्रो से मैनुफैक्चरिंग तक हर क्षेत्र में भारत-जापान की साझेदारी विश्वास का प्रतीक बनी है और जापान की कंपनियों ने भारत में 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान यात्रा की शुरुआत में भारत-जापान इकनॉमिक फोरम को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान से अपने पुराने रिश्तों को याद किया और जापानी कंपनियों को भारत में निवेश करने न्यौता दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के बड़े बिजनेस लीडर्स से कहा, आज दुनिया सिर्फ भारत को देख ही नहीं रही है बल्कि भारत पर भरोसा भी कर रही है। मैं आपसे आग्रह करता हूं, आइए, भारत में बनाइए, विश्व के लिए बनाइए। सुजुकी और डाइकिन की सफलता की कहानी आपकी भी सफलता की कहानी बन सकती है। अमेरिका से चल रहे टैरिफ वॉर के बीच प्रधानमंत्री मोदी का जापानी कंपनियों को यह आमंत्रण अहम माना जा रहा है।
सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध कार्यकारी निदेशक और कंपनी के भारतीय बाजार के प्रमुख राजीव खन्ना ने प्रधानमंत्री मोदी के जापान दौरे पर कहा, यह प्रधानमंत्री मोदी की नौवीं जापान यात्रा है। वे जापान, जापानी कंपनियों और जापानी लोगों से बेहद परिचित हैं। कई वर्षों के बाद अपनी यात्रा के दौरान उनका व्यापार पर ध्यान केंद्रित करना बहुत सकारात्मक है। जापानी कंपनियों के दृष्टिकोण से, वे एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण हालात देख रहे हैं, जिसमें कुछ कंपनियों की टैरिफ बाधाएं बढ़ रही हैं और घरेलू बाजार सिकुड़ रहा है। भारत में निर्माण करना और दुनिया को बेचना एक अच्छा और वास्तविक अवसर है। ऑटो क्षेत्र में और भी बहुत कुछ किया जा सकता है। जापानी कंपनियां सेमीकंडक्टर और अन्य उच्च-तकनीकी उद्योगों में भारत में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण आपूर्ति का लाभ उठा सकती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब सात साल बाद भारत-जापान के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने गए हैं। इससे पहले वे 2018 में इस सम्मेलन का हिस्सा बने थे। मोदी जापान दौरे के बाद शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन के लिए चीन भी जाएंगे। यहां वे तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के न्योते पर बैठक का हिस्सा बनेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन से इतर शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के प्रसंग में यह जानना अहम है कि आखिर भारत के लिए इसकी क्या अहमियत है और दोनों देश किस मुद्दे पर बात करेंगे। इसके अलावा भारत और जापान किन-किन समझौतों पर मुहर लगा सकते हैं। भारत किस एक समझौते पर सबसे करीबी से नजर रख रहा है। इसके अलावा ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले के बीच दोनों देश आर्थिक रिश्तों को लेकर क्या कर सकते हैं।
भारत और जापान के ऐतिहासिक-पारंपरिक संबंधों के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग भी उत्तरोत्तर बढ़ा है। इसमें भारत की एक्ट-ईस्ट पॉलिसी और सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रिजन (सागर) जैसी पहल भी शामिल है। इसके अलावा भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआई) की नीति, जापान की मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत दृष्टि के साथ समाहित हो गई। इसके अलावा भारत-जापान अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (सीडीआरआई), और उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्व समूह (लीडआईटी) जैसी पहल में साझेदार हैं। इसके अलावा, दोनों देश क्वाड ढांचे और भारत-जापान सप्लाई सप्लाई चेन रेजिलियंस इनीशिएटिव (एससीआरआई) में भी सहयोगी हैं।
लिहाजा, पीएम मोदी की जापान यात्रा अमेरिका से अलग-अलग मसलों पर तनाव के बीच मुख्यतः सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्रित रहेगा। वह भी खास तौर पर क्वाड गठबंधन के मुद्दे पर। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने क्वाड को लेकर कहा, क्वाड वास्तव में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, समृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। हाल के वर्षों में, इसका एजेंडा व्यावहारिक सहयोग के मुद्दों तक फैला है और इसमें स्वास्थ्य सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। हाल ही में महत्वपूर्ण खनिजों, आपूर्ति श्रृंखलाओं को और अधिक लचीला बनाने और बुनियादी ढांचे के विकास के संबंध में भी चर्चा हुई है। ये सभी मुद्दे भारत और जापान दोनों के लिए प्राथमिकता वाले हैं। दोनों देश इस मंच और इस साझेदारी को बहुत महत्व देते हैं। हम अपने सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सभी क्वाड भागीदारों के साथ काम करने के लिए तत्पर हैं।
अमेरिका से कारोबारी रिश्तों में तनाव के चलते भारत रक्षा क्षेत्र में भी अपने विकल्पों को बढ़ाना चाहता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री इशिबा के बीच रक्षा समझौता एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। विक्रम मिस्री ने कहा, दोनों देश मिलकर यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना का सह-निर्माण कर रहे हैं, यूनीकॉर्न प्रोजेक्ट पर भी नवंबर 2024 में हस्ताक्षर किए गए थे। भारतीय नौसेना और जापानी नौसेना भी भारत में जहाज मरम्मत के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाश रही हैं। दोनों देश 2008 के सुरक्षा सहयोग घोषणा के तहत रक्षा रिश्तों को आगे बढ़ाने पर भी मुहर लगा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो भारत और जापान के बीच साझा स्तर रक्षा उपकरण और हथियार बनाने का समझौता भी हो सकता है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही जापान की तरफ से भारत को फाइटर जेट के इंजन से जुड़ी तकनीक साथ में विकसित करने का न्यौता भी मिला था।
भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और जापान दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों से निपटने के लिए कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बना सकते हैं। इनमें आयात-निर्यात और निवेश से जुड़े कुछ बड़े समझौते होने के कयास लगाए जा रहे हैं। हाल ही में जापानी प्रधानमंत्री ने जापानी अखबार निक्केई एशिया को बताया था कि वह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने के लिए भारत में अगले एक दशक में 10 ट्रिलियन येन (करीब 5.95 लाख करोड़ रुपए) के निवेश से जुड़ी योजनाओं का ऐलान कर चुके हैं। दोनों देश दवाओं से लेकर ऑटो सेक्टर तक एक-दूसरे के करीबी साझेदार बनने की तैयारी कर रहे हैं।
जापानी मीडिया के मुताबिक, भारत में निवेश के जरिए जापानी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर जैसे कूटनीतिक सेक्टरों में अपनी पहुंच बनाना चाहती है। यह कंपनियां भारत में अपना सेटअप लगाने के बाद भारतीय विशेषज्ञों को रोजगार देंगी, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते और बेहतर होंगे। इसके अलावा भारत-जापान की एआई कंपनियां साझा तौर पर उभरती तकनीकों पर काम शुरू करेंगी। इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी जापान दौरे के दूसरे दिन टोक्यो में इलेक्ट्रॉन नाम की कंपनी भी जाएंगे। यह कंपनी जापान में चिप निर्माण के लिए लगने वाले उपकरणों की बड़ी निर्माता है। भारत ने जापानी कंपनियों के जरिए अपने सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा है।
प्रधानमंत्री मोदी जापान दौरे में सेंडाई स्थित तोहोकु शिंकानसेन प्लांट भी जाएंगे। यहां बुलेट ट्रेन के कोच का निर्माण होता है। दोनों नेताओं के बीच भारत के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर चर्चा की भी संभावना है। दरअसल, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए भारत को ई10 बुलेट ट्रेन पर समझौता करना है। इसकी रफ्तार 320 किमी प्रतिघंटा है और इसमें भूकंप के दौरान पटरी से उतरने से बचाने की तकनीक भी है। बताया जाता है कि ई10 बुलेट ट्रेन भविष्य में ड्राइवरलेस हो जाएंगी।
भारत-चीन साथ काम करें तो वैश्विक अर्थ-व्यवस्था स्थिर होगी : मोदी
टोक्यो, 29 अगस्त (एजेंसियां)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान पीएम मोदी ने भारत-जापान के साथ-साथ चीन के साथ स्थिर संबंधों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का साथ काम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली आपसी सम्मान, साझा हितों और परस्पर संवेदनशीलता के आधार पर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। जापान यात्रा के दौरान द योमिउरी शिंबुन को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देश और पड़ोसी भी हैं। अगर आपसी संबंध स्थिर, पूर्वानुमेय और मैत्रीपूर्ण बनाएं, तो उसका सकारात्मक असर क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि पर पड़ेगा।
चीन के साथ संबंध सुधारने के महत्व पर पूछे गए सवाल पर मोदी ने कहा, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर मैं यहां से तिआनजिन जा रहा हूं ताकि एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकूं। पिछले वर्ष कजान में राष्ट्रपति शी से मेरी मुलाकात के बाद हमारे द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर और सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दो पड़ोसी और दुनिया के दो सबसे बड़े राष्ट्रों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने कहा, विश्व अर्थव्यवस्था में वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के लिए विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और विकासात्मक चुनौतियों का समाधान करने के लिए रणनीतिक संचार को बढ़ाने के लिए तैयार है।
जापानी सरकार की फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत) अवधारणा पर मोदी ने कहा कि इसमें जापान और भारत के बीच गहरा सामंजस्य है। उन्होंने कहा कि विजन महासागर और इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव भारत के अपने दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। मोदी ने कहा, भारत और जापान एक शांतिपूर्ण, समृद्ध, स्थिर और ऐसा इंडो-पैसिफिक चाहते हैं जहां राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो। दोनों देशों के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से गहरे रिश्ते हैं और हम कई बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
रूस और यूक्रेन के नेताओं के साथ अपनी हालिया बातचीत के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने इस संघर्ष पर एक सैद्धांतिक और मानवीय रुख बनाए रखा है। जिसकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की दोनों ने समान रूप से सराहना की है। उन्होंने जापानी अखबार को बताया, इसी के अनुरूप दोनों नेताओं ने संघर्ष से संबंधित घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा करने के लिए मुझसे बात की। मैंने भारत के सैद्धांतिक और सुसंगत रुख को दोहराया और संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्रोत्साहित किया। मैंने पहले ही संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के उद्देश्य से सार्थक प्रयासों का समर्थन करने की भारत की इच्छा व्यक्त की है।
ग्लोबल साउथ के महत्व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि वैश्विक समुदाय ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करके एक अधिक समतापूर्ण विश्व बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री ने कहा, अगर हमें इस प्रतिबद्धता पर खरा उतरना है, तो ग्लोबल साउथ को प्राथमिकता देनी होगी। एक अत्यधिक परस्पर जुड़ी हुई दुनिया में, हमने ग्लोबल साउथ पर महामारी, संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के दुर्बल करने वाले प्रभाव को देखा है। उन्होंने कहा कि उन्हें वैश्विक शासन, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, ऋण और वित्तीय तनाव से जुड़ी असंख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिनका उनकी विकास प्राथमिकताओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ग्लोबल साउथ के सदस्य होने के नाते हम इन चिंताओं और लोगों के जीवन पर उनके प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझते हैं। हमने इन्हें वैश्विक एजेंडे में सबसे आगे लाने के लिए अथक प्रयास किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसी प्रकार, ब्रिक्स में भी भारत वैश्विक दक्षिण के लाभ के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। भारत ब्रिक्स के साथ अपने जुड़ाव को महत्व देता है, जो परामर्श और सहयोग के लिए एक मूल्यवान मंच के रूप में उभरा है और जिसने साझा हितों के विशिष्ट मुद्दों पर आपसी समझ को बढ़ावा देने में मदद की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं में तात्कालिक और व्यापक सुधार की मांग करता रहा है ताकि वे वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सकें। उन्होंने कहा, भारत ने वैश्विक बहुपक्षीय संस्थानों में तत्काल और व्यापक सुधारों का भी लगातार आह्वान किया है ताकि उन्हें और अधिक प्रभावी बनाया जा सके और वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित किया जा सके। उन्होंने बताया कि 2004 में अपनी स्थापना के बाद से पिछले 20 वर्षों में क्वाड वैश्विक भलाई की एक शक्ति के रूप में उभरा है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोगों के लिए सकारात्मक परिणाम प्रदान कर रहा है।
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