ड्रैगन और हाथी लाएंगे स्थिरता और समृद्धि

चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा

ड्रैगन और हाथी लाएंगे स्थिरता और समृद्धि

मोदी के टैरिफ विरोध से चीन खुश

नई दिल्ली, 29 अगस्त (एजेंसियां)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ-ट्रिक के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताल ठोकने से टैरिफ प्रभावित तमाम देश काफी गदगद हैं। इनमें चीन प्रमुख है। चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ड्रैगन और हाथी ही दुनिया में स्थिरता और समृद्धि लाएंगे। ग्लोबल टाइम्स ने लिखामोदी की चीन यात्रा भारत-चीन संबंधों को सुधारने का एक बढ़िया अवसर है। दोनों देश अपने रिश्तों को साझेदार की तरह संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की जापान यात्रा के बाद एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के शहर तिआनजिन जाएंगे। वहां प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात हो सकती है। एससीओ सम्मेलन के दौरान ही प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी मुलाकात होगी। ट्रंप के टैरिफ-ट्रिक को लेकर भारत की अमेरिका के साथ संबंधों में तल्खी के बीच जापानरूस और चीन के प्रमुखों से प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत को अहम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा हैभारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन के तियानजिन शहर में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह 7 वर्षों में उनकी पहली चीन यात्रा है। इसे दोनों देशों के बीच संबंधों में आई ठंडक के बाद इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन अपने कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे कर रहे हैं।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कुछ सकारात्मक घटनाएं हुई हैंजैसे हिमालयी सीमा पर सैनिकों द्वारा मिठाइयों का आदान-प्रदानभारतीय तीर्थयात्रियों के लिए तिब्बत की यात्रा फिर से शुरू होना और भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की संभावना जताई जाना। यह सब इस ओर इशारा करता है कि दोनों देश धीरे-धीरे अपने रिश्तों को सुधारने की दिशा में बढ़ रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि गलवान की घटना के बाद दोनों देश यह मानने लगे हैं कि सीमा विवादों के बजायसंसाधनों को आर्थिक विकास और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर लगाना अधिक तर्कपूर्ण है। सुस्त वैश्विक आर्थिक सुधारों के बीच दोनों देशों को आर्थिक विकास के लिए स्थिरता जरूरी है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार साल-दर-साल 1.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 138.478 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।

Read More वायु प्रदूषण से भारत में घट गए जिंदगी के 3.5 साल

संपादकीय में लिखा है कि 2025 की शुरुआत से ही दुनिया में रूस-यूक्रेन युद्धमिडिल ईस्ट की अशांति और अमेरिका की घरेलू राजनीति और विदेश नीति में बदलाव जैसी कई समस्याएं आई हैं। अमेरिका अब अपने सहयोगियों को समर्थन देने के बजाय लेन-देन की राजनीति अपना रहा हैकुछ जगहों पर तो अमेरिका ने सहयोगियों और साझेदारों की कीमत पर लाभ लेने की नीति अपनाई है। इससे भारत-अमेरिका संबंधों में भी खटास आई है।

Read More  'सियासी' जजों के चेहरे से नकाब हटना जरूरी

इस संपादकीय में प्रधानमंत्री मोदी के भारत के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए संबोधन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें लिखा हैप्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर कहा था कि भारत अपने किसानों के हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा और किसी भी दबाव के सामने दीवार बनकर खड़ा रहेगा। भारत अब व्यापार में विविधता लाने के लिए करीब 40 देशों के साथ मिलकर नीतियों पर काम कर रहा है। यह रणनीतिक स्वतंत्रता चीन की विदेश नीति से मेल खाती हैजिससे दोनों देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाएं बन रही हैं। इसमें स्पष्ट रुप से लिखा है कि कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थान इस सुधार को अमेरिका-विरोधी गठबंधन के रूप में दिखाने की कोशिश करते हैंलेकिन यह सच्चाई को गलत ढंग से पेश करता है। भारत और चीन की विदेश नीति स्वतंत्र और अपने-अपने राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित है।

Read More  सीएम मृतकों के परिजनों ने एलजी के खिलाफ खोला मोर्चा

संपादकीय के अनुसारसीएनएन की एक टिप्पणी में सही कहा गया कि भारत-चीन संबंधों में बदलाव भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता की नीति का उदाहरण हैजो किसी भी गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता देती है। संपादकीय में लिखा है कि इतिहास की ओर देखें तो भारत उन पहले देशों में से थाजिन्होंने पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता दी थी। भारत और चीन ने 1950 के दशक में पंचशील सिद्धांत का प्रस्ताव दिया था जो आज भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक मूल भावना है। इसमें कहा गया हैएशिया के आर्थिक विकास के डबल इंजन होने के साथ-साथग्लोबल साउथ के प्रमुख प्रतिनिधि और एससीओब्रिक्स और जी-20 के सदस्य होने के नातेचीन और भारत की साझा जिम्मेदारी है कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को और अधिक लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण दिशा में आगे बढ़ाएं।

ग्लोबल टाइम्स ने आखिर में लिखामोदी की चीन यात्रा भारत-चीन संबंधों को सुधारने का एक बढ़िया अवसर है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब दोनों बड़े देश अपने रिश्तों को विरोधी नहीं बल्कि साझेदार की तरह संभालने की कोशिश कर रहे हैं। अखबार ने लिखाजब भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे कर रहे हैंतब उम्मीद की जा रही है कि नई दिल्ली और बीजिंग दोनों मिलकर एक नया अध्याय लिखेंगेजहां ड्रैगन और हाथी मिलकर दुनिया में शांतिस्थिरता और समृद्धि की दिशा में योगदान देंगे।

#ChinaIndiaRelations, #GlobalTimes, #DragonAndElephant, #IndiaChina, #NarendraModi, #TradePolicy, #Tariff, #IndiaChinaTrade, #StabilityAndProsperity, #ModiGovernment