मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा के बीच खरगे ने हाई कमान की अहमियत दोहराई

मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा के बीच खरगे ने हाई कमान की अहमियत दोहराई

बेंगलुरु, 23 नवंबर (एजेंसियां)। कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को बेहद संयमित जवाब दिया। यह जवाब पार्टी के आंतरिक मामलों में अब लगभग आम बात हो गया है- एक ऐसी चुप्पी जो सब कुछ कहती है, जबकि जुबान पर कुछ भी नहीं आता।


श्री खरगे ने संवाददाताओं से कहा कि जो भी करना होगा, वह पार्टी हाईकमान तय करेगा। यह बयान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के साथ एक हफ्ते के अंदर उनकी दूसरी लंबी मुलाकात के बाद आया है। यह मुलाकात 20 नवंबर को सरकार के ढाई साल (आधे कार्यकाल) पूरा होने के बाद शुरू हुई नयी अटकलों के बीच हुई थी।

श्री सिद्दारमैया ने शनिवार रात श्री खरगे से मिलने के बाद कहा था कि वे नेतृत्व के किसी भी फैसले को स्वीकार करेंगे और दूसरों को भी ऐसा ही करना चाहिए। उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को मुख्य रूप से मीडिया द्वारा फैलाई गई अटकलें बताया था।

राज्य में जो हालात बन रहे हैं, वे कांग्रेस के झगड़े सुलझाने के खास तरीके को दिखाते हैं। ऐसे बयान जो बहुत कम बताते हैं, चुपचाप उठाए गए कदम, और एक ऐसा अथॉरिटी सेंटर जो ऐलान के बजाय छिपाना पसंद करता है। संकेत हल्के हैं, लेकिन पार्टी के अंदर, अक्सर चालाकी ही सबसे ज़्यादा मायने रखती है।

Read More  हाथ में थमाया 1984 दंगा लिखा हुआ बैग

उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से जुड़े विधायकों के दिल्ली जाकर श्री खरगे से मिलने की खबरों ने साजिश को और गहरा दिया। श्री शिवकुमार ने इन मुलाकातों की जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे दौरों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। राजनीतिक जीवन में इस तरह का इनकार अक्सर यह पुष्टि ही करता है कि कुछ न कुछ जरूर चल रहा है।

Read More Maha Kumbh Mela Train: क्या किया गया महाकुंभ मेले के लिए ट्रेन में मुफ्त यात्रा का प्रावधान? भारतीय रेलवे का आया इस पर बड़ा बयान

रविवार को श्री सिद्दारमैया के करीबी मंत्रियों एच.सी. महादेवप्पा और श्री के. वेंकटेश ने भी श्री खरगे से मुलाकात की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, श्री सिद्दारमैया मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि श्री शिवकुमार चाहते हैं कि कोई भी फेरबदल नेतृत्व के अंतिम फैसले के बाद ही हो।

Read More नेताओं ने संसद में लगाया करोड़ों का चूना

अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यदि मंत्रिमंडल फेरबदल को मंजूरी मिलती है, तो इसे बड़े पैमाने पर यह संकेत माना जाएगा कि श्री सिद्दारमैया अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे श्री शिवकुमार के लिए मुख्यमंत्री बनने की गुंजाइश बहुत कम रह जाएगी। 2023 के उस कथित रोटेशनल फॉर्मूले का साया अभी भी मंडरा रहा है-जिसे कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया और न ही कभी स्पष्ट रूप से खारिज किया गया।

फिलहाल पार्टी का एकमात्र जवाब यही है कि हाईकमान फैसला करेगा। चाहे वह फैसला जल्द आए या लंबी चुप्पी के बाद, कर्नाटक का राजनीतिक वर्ग हर मुलाकात, हर इनकार और हर ठहराव का मतलब बखूबी समझ रहा है। दुविधा हमेशा की तरह इसमें नहीं है कि क्या कहा गया, बल्कि इसमें है कि क्या अनकहा रह गया।