‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी में तीन गिरफ्तार
हैदराबाद: साइबर फ्रॉड-माफिया का पर्दाफाश
हैदराबाद, 30 नवंबर (एजेंसियां)। हैदराबाद में रविवार (30 नवंबर 2025) को साइबर अपराध टीमों ने दो बड़े अभियानों में सफलता हासिल की है — एक तरफ हैदराबाद-केंद्रित फर्जी "डिजिटल अरेस्ट" स्कैम का भंडाफोड़ हुआ, दूसरी तरफ एक ‘म्यूल अकाउंट माफिया’ गिरोह पकड़ा गया है।
पुलिस के अनुसार, पहले मामले में 71 वर्षीय बुज़ुर्ग — चागंती हनुमंथा राव — को झांसा देकर बताया गया कि उनके आधार नंबर का उपयोग अवैध गतिविधियों में हो रहा है और वे आरोपी हैं; फिर फर्जी FIR भेजकर, उन्हें डराया-धमकाया गया और बैंक खातों में 1.92 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाए गए। बाद में यह धोखाधड़ी उजागर हुई। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों — पांडु विनीत राज, जी. तिरुपाथैया, और गौनी विश्वनाथम — को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी फरार है।
दूसरे मामले में, साइबराबाद पुलिस ने देश के सबसे बड़े ‘म्यूल अकाउंट माफिया’ नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस गिरोह ने 400 से अधिक ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड में मुट्ठी भर म्यूल खातों (bank accounts / SIM / identity documents) का इस्तेमाल किया था। अनुमानित नुकसान करीब ₹1.09 करोड़ हुआ है।
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह फर्जी निवेश प्लेटफार्मों, फर्जी “इन्वेस्टमेंट” स्किम और क्रिप्टो/नकली बैंकिंग नेटवर्क चला रहा था। उन्होंने म्यूल अकाउंट्स — जिनका इस्तेमाल फ्रॉडर्स पैसे की सप्लाई चेन के लिए करते थे — सप्लाई करने, SIM कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराने जैसे काम संभाले थे।
हैदराबाद पुलिस ने नागरिकों से आगाह किया है कि “डिजिटल गिरफ्तारी” नाम की कोई वैध प्रक्रिया नहीं होती; यदि किसी सरकारी या जांच एजेंसी की तरफ से कॉल/संदेश आये जिसमें बैंक-पैसा ट्रांसफर करने को कहा जाए, तो उसे धोखाधड़ी समझें। किसी भी दस्तावेज़ या FIR दिखाकर पैसे मांगना फर्जी मामला होता है। पीड़ितों से तुरंत 1930 पर कॉल या cybercrime.gov.in पर शिकायत करने को कहा गया है।
यह घटना हैदराबाद में साइबर अपराध की बढ़ती चिंताओं की याद दिलाती है — खासकर बुज़ुर्ग, जागीरदार या अकेले रहने वालों के लिए। साथ ही, यह दिखाती है कि म्यूल अकाउंट व फ्रॉड नेटवर्क की जटिलता कितनी बढ़ चुकी है।

